सिंधु सभ्यता की सर्व प्रथम खोज के संदर्भ महत्वपूर्ण सभ्यता होने के मत दिए हैं 1826 में मैं जब चार्ल्स मिशन नामक अंग्रेज अधिकारी के द्वारा वहां से उसे कोई सभ्यता होने का दावा किया परंतु इसे आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया गया इसके पश्चात 1856 ईसवी में जब बटन बंधुओं के द्वारा रेलवे लाइन डालने के लिए हड़प्पा का उत्खनन किया तभी वहां ईटें प्राप्त हुई और उन्होंने हड़प्पा सभ्यता होने का उल्लेख किया परंतु इस पर ध्यान नहीं गया इसके पश्चात 1912 ईस्वी में जे ए
फ्लीट महोदय ने हड़प्पा कालीन उत्खनन से प्राप्त मुद्राओं को प्रकाश कर करवायाऔर उनको प्रकाश में लाया गया था
नामकरण
इसके पश्चात जब 1920 में माधव स्वरूप पर और दयाराम साहनी के द्वारा जॉन मार्शल के नेतृत्व में पाकिस्तान की माउंट गु मरी क्षेत्र का उत्खनन प्रारंभ किया यह स्थल हड़प्पा नामक ना होने के कारण हड़प्पा सभ्यता नाम दिया गया कुछ समय पश्चात 1922 ईस्वी में सिंध नदी के किनारे मोहनजोदड़ो नामक स्थान से सभ्यता होने की जानकारी प्राप्त हुई और इश्क उत्खनन श्री राखल दास बनर्जी के द्वारा किया गया तब इसका नाम मोहनजोदड़ो लिया गया इस इसके पश्चात कई स्थलों की खोज हुई जो ज्यादातर सिंधु नदी के किनारे का इसी कारण इसी सिंधु सभ्यता कहा गया परंतु इसके पश्चात सिंधु के साथ-साथ इसकी सहायक नदी सरस्वती नदी के किनारे भी पूरा स्थलों की खोज हुई इसी कारण इस कविता को सिंधु सरस्वती सभ्यता का हाल है लेकिन इस सभ्यता उत्खनन से ज्यादातर मात्रा में कौन सी धातु की प्राप्ति हुई इसी कारण यह सविता कांस्य युगीन सभ्यता के नाम से जानी जाती है
विशेष
1 हड़प्पा सभ्यता सबसे पहले इस स्थल की खोज होने के कारण इस सभ्यता को हड़प्पा सभ्यता खा जाता है
2 सिंधु सभ्यता सिंधु नदी के आस पास स्थलों की खोज होने के कारण इसे सिंधु सभ्यता नाम दिया गया था
3 सिंधु सरस्वति सिंधु और सरस्वती नदी के किनारे स्थल मिलने के कारण इस सभ्यता का नाम सरस्वती सभ्यता दिया गया था
4 काँस्य युगीन सभ्यता इस सभ्यता में अधिक मात्रा में कांस्य धातु की प्राप्ति हुई है इसी कारण इसे कांस्य युगीन सभ्यता खा जाता है
सिन्धुसभ्यता का कालक्रम
सिंधु सभ्यता के बारे में विद्वान एकमत नहीं है इसी कारण इस सभ्यता कालक्रम के बारे में अपने अलग-अलग मत दिए हैं जो इस प्रकार से हैं मार्टिन व्हीलर के अनुसार इस सभ्यता का कार्यक्रम 30 ईसवी से लेकर 1500 तक है रेडियो कार्बन विधि के अनुसार इस सभ्यता का कार्यक्रम 35 साल पूर्व से लेकर तेरा ईसा पूर्व है इस विधि को तीन भागों में बांटा गया है एक पूर्व हड
विस्तार
सिंधु सभ्यता का विस्तार सिंधु सभ्यता का विस्तार भी बहुत अधिक है यह उत्तर में मांडा से लेकर दक्षिण के के दैमाबाद वे पूर्व पूर्व में आलमगीरपुर से लेकर पश्चिम की सुत्कन्गेडोर तक विस्तृत है इसकी उत्तर से दक्षिण तक की लंबाई 1600 किलोमीटर वह पूर्व से लेकर पश्चिम तक की लंबाई 1400 किलोमीटर हैं सिंधु सभ्यता के प्रमुख पुरास्थल अफगानिस्तान में सो सो गई वह मुंडी कार है पाकिस्तान में 1 बलूचिस्तान में सुतकांगडोर बालाकोट डाबर कोट आदि है।
a सुतकांगेन्डोर यह पश्चिम बलूचिस्तान के दासक के नदी के तट पर स्थित है इसकी खोज आरेल स्टाइन के द्वारा की गई इसे हड़प्पा कहां व्यापार का चौराया भी कहा जाता है
bआलमगीरपुर यह सिंधु सभ्यता का पूर्वी स्थल है जो हिंडन नदी किनारे स्थित है
c दैमाबाद यह दक्षिण में प्रवरा नदी के किनारे स्थित है
d मांडा यह सिंधु सभ्यता का उत्तरी स्थल है जो चिनाब नदी के किनारे स्थित है
सिंधु सभ्यता का विस्तार भारत ,पाकिस्तान,अफगानिस्तान देशो में विस्तृत है
अफगानिस्तान
अफगानिस्तान में सिंधु सभ्यता के दो प्रमुख स्थल है
1 शोर्तुगाई
2 मुंडीगार्क
पाकिस्तान
पाकिस्तान में सिंधु सभ्यता के प्रमुख पूरा स्थल है
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