शिवाजी
शिवाजी का जन्म २० अप्रेल 1627 को शिवनेर की पहाड़ी के किले पर हुआ था इनके पिता का नाम शाह जी था इनका भोंषले वंश से था तथा माता का नाम जीजा बाई था जो देवगिरी के यादव वंशज के लाखूजी जाधवराव की पुत्री थी ऐसा कहा जाता है की मालोजी जो लाखूजी के घर नौकरी करने आये थे उसी समय शाह जी साथ थे तभी लाखूजी यादव ने अपनी पुत्री जीजा बाई का विवाह शाह जी करवा दिया जाता है ऐसा माना जाता है की लाखूजी यादव वंशज का संबंध मेवाड़ के सिसोदिया वंश से था इसके पश्चात शिवाजी को बेंगलुरु की जागीर मिलती है तथा इसके साथ ही शाहजी का भाई संभाजी भी मौजूद थे लेकिन इसके पश्चात शाह जी को बीजापुर की सेवा में गई तथा वहां पर रहते हुए शहाजी तुका बाई से विवाह कर लेते हैं जिसके कारण जीजाबाई का परित्याग कर देते हैं और जीजाबाई को शिवनेर पूना भेज दिया जाता है उसी समय उसी समय 1627 ईस्वी को शिवाजी का जन्म होता है और इसके पश्चात शिवाजी का बचपन अपनी माता जीजाबाई की देखरेख में बीता है तभी बचपन में उनका संरक्षण दादाजी कोंडदेव था तथा शिवाजी का गुरु रामदास था जिसने दासबोध नामक ग्रंथ की रचना की इसके पश्चात शिवाजी ने वहीं पर पुणे की जागीर में रहते हुए बचपन बिताया तथा 1646 में सर्वप्रथम कोंडाणा के किले को विजित करते हैं इसके पश्चात राजगढ़ के किले को विजीत किया जाता हैं इसके पश्चात 1647 इसमें में कोडाना का किले को विजित किया जाता है जिसका नाम बाद में सिंहल गढ़ रखा जाता हैं जब 1648 ईस्वी में शिवाजी के पिता शाहजी भोंसले को बीजापुर की सुल्तान ने कैद कर लिया तब शिवाजी ने मुगलों को सहायता देने का निश्चय किया यह खबर सुनकर बीजापुर का सुल्तान शिवाजी के पिता शाहजी को मौका दिया इसके पश्चात शिवाजी कुछ समय के लिए अपना प्रशासन सुदृढ़ीकरण में समय बिताया तथा इसके पश्चात 1654 ईस्वी में शिवाजी की द्वारा पुरंदर का किला को विजित किया गया इसके पश्चात शिवाजी की द्वारा 1656 इसी में जावली के किले पर आक्रमण किया और वहां के शासक चंद्रावली को पराजित किया इसके पश्चात शिवाजी का जावली पर अधिकार हो गया और 1657 में शिवाजी की द्वारा कोकण पर आक्रमण किया गया और के किले को मिस किया इसके साथ ही कोकण की कल्याण भिवंडी माहुल पर भी अधिकार कर लिया गया
- 1657 ईसवी में ही शिवाजी तथा मुगलों के मध्य संघर्ष आरंभ होता है उसी समय दक्षिणी मुगल साम्राज्य का गवर्नर औरंगजेब था
1659 ईस्वी में शिवाजी के द्वारा कई क्षेत्रों पर अपना अधिकार कर लिए जाने के कारण बीजापुर का सुल्तान बेबी हुआ और अपने प्रधान सेनापति अफजल खान को भेजा अफजल खान कहां की वह शिवाजी को अपनी थोड़ी सी उतरे बिना ही बंदी बनाकर लेकर आएगा इसीलिए अफजल खान नीति के चाल चलते हुए शिवाजी की संधि का प्रस्ताव अपनी मंत्री कृष्ण जी भास्कर को भेजता है लेकिन शिवाजी हिंदुओं की मर्यादा को ध्यान रखती हुई कृष्ण जी भास्कर को समझाते हैं तब कृष्ण जी भास्कर अफजल खान का भेद बता देते इसी कारण जब वह कर संजय भास्कर अफजल खान के शिविर में पहुंचते हैं वहीं दूसरी ओर शिवाजी भी तैयार होकर अपने विश्वस्त सैनिकों को झाड़ियों में छुपा दे दे और अपने आप को सुरक्षित रखने के लिए अपने हाथों में बग नखा पेनकर पहनकर शिवाजी अफजल खान की सामने उपस्थित होते हैं शिवाजी अफजल खान से मिलने गए तब अपने साथ जीमेल वे शंभू जी ताऊ जी को साथ लेकर आए वही अफजल खान शिवाजी दोनों गले मिलते हैं तभी अफजल खान शिवाजी को मारने का प्रयास करते हैं वही शिवाजी के द्वारा अफजल खान की हत्या कर दी जाती है वहीं दूसरी ओर अफजल खान पी अपने साथ अपना प्रसिद्ध तलवारबाज सैयद बांदा को साथ लेकर शिवाजी के सामने उपस्थित हुआ लेकिन शिवाजी की तत्परता देखकर वह भी कुछ नहीं कर सका और अफजल खान मारा जाता इसके पश्चात शिवाजी के द्वारा पुणे में एक सैनिक दरबार लगाया जाता है
शाहिस्ता खान से संघर्ष शिवाजी की बढ़ती हुई घटना से मुगल शासक औरंगजेब भयभीत हो जाता है और 1659 में ही अपने अपने मामा शाइस्ता को शिवाजी की विरुद्ध दक्षििण का दक्षिण का सूबेदार बना कर भेजता है साहित्य का के द्वारा बीजापुर की सुल्तान से गठबंधन स्थापित कर लिया जाताा है और इसीी के पूना चाकन कहिया कल्याण पर अधिकार
जब शाइस्ता खान के द्वारा 15 अप्रैल 1663 को शाइस्ता खान पूना पर अधिकार करता है और शाम को विश्राम कर रहा था तभी शिवाजी के द्वारा रात्रि में बरात के रूप में अपने सैनिक सहित पूर्णा में उपस्थित होते हैं और शाइस्ता खां पर आक्रमण कर देते हैं इसी समय शाइस्ता खान भयभीत हो जाता है और वे भागता है इसी समय उसकी अंगुली दरवाजे में फंस जाती है और टूट जाती है इसी समय शाहिद खां के पुत्र अब्दुल फतेह खां की हत्या कर दी जाती हैं
सूरत की लूट। 1664 ईस्वी में शिवाजी के द्वारा सूरत पर धावा बोला जाता है इसी समय सूरत का गवर्नर इनायत खान और शिवाजी को इस लूट में अत्यधिक धन की प्राप्ति होती है ऐसा कहा जाता है कि शिवाजी के द्वारा इस लूट में विदेशी शक्तियां डच तथा अंग्रेजों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाता है इसी समय अंग्रेज बच्ची का प्रमुख सर जॉन ऑक्साइड एंड था
पुरंदर की संधि 1665 जब शिवाजी की सफलताओं से भयभीत होकर औरंगजेब के द्वारा नई पर यह शुरू किया जाता है जिसके तहत उसने आमिर के शासक मिर्जा राजा जय सिंह को शिवाजी का दमन करने हेतु भेजा जाता है इसमें मिर्जा राजा जयसिंह की द्वारा पुरंदर का घेरा डाला जाता है जब जय सिंह के द्वारा पुरंदर का गिरा डाला जाता है उसी समय शिवाजी का प्रमुख सेनापति मुरार वीजा प्रभु था जो इस युद्ध में शहीद होता है अंत में शिवाजी के द्वारा आत्मसमर्पण करना पड़ता है और शिवाजी की द्वारा पुरंदर की संधि करने के लिए विवश होना पड़ता है
संधि की शर्ते
1 शिवाजी की अपनी जीते हुए किलो में से 22 किल्ले मुगलों को सौंपने होंगे
2 शिवाजी के पुत्र को किस संधि के तहत 5000 का मनसब दिया जाएगा
3 शिवाजी को बीजापुर के सुल्तान कुछ सहायता देने के लिए वचनबद्ध किया जाएगा
इसके पश्चात 12 मई 1666 को शिवाजी अपने पुत्र के साथ औरंगजेब की दरबार उपस्थित होते हैं तभी शिवाजी को अपने से पराजित तथा 5000 मनसबदारी में पीछे खड़ा किया जाता है इससे शिवाजी नाराज हो जाते हैं वह वहां से निकलने का प्रयास करते हैं तभी औरंगजेब के कहने पर उन्हें उन्हें कैद कर लिया जाता है और आगरा की राम सिंह के महल में ठहराया जाता है खेत में रहती हूं शिवाजी परेशान रहने लगते हैं तभी एक दिन उनके द्वारा बहाना बनाया जाता है कि मैं बीमार हूं इसलिए गरीबों को फल अनाज दान देना चाहता हूं कई दिनों तक शिवाजी के द्वारा फलों व अनाज का दान किया जाता है प्रारंभ में तुम सैनिकों के द्वारा अनाज व फलों की टोकरी की जांच की जाती है परंतु कई दिनों बाद यह जांच करना सैनिक छोड़ देते हैं शिवाजी एक दिन मौका देखकर उन टोकरी ओं में मैं स्वयं तथा अपने पुत्र सहित निकल जाते हैं तथा अपनी जगह अपनी भाई हीरो जी को को लिटा कर निकल जाते हैं इसके पश्चात शिवाजी साधु की भी इसमें पहले मथुरा गई तथा इसके पश्चात वह काशी पर्याग होती हुई गोंडवाना वे गोलकुंडा से होती हुई वे रायगढ़ पहुंचते हैं और रायगढ़ जब पहुंचते ही तब 12 सितंबर 1666 को समय था
इसके पश्चात औरंगजेब के द्वारा शिवाजी की गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए अपने पुत्र मुअज्जम को दक्षिण में सूबेदार बनाकर भेजा जाता है और मोअज्जम 1667 ईस्वी को दक्षिण पहुंचता है और 16 से 68 ईसवी में शिवाजी के साथ एक संधि की जाती है इस संधि में मारवाड़ का शासक जसवंत सिंह भी शामिल था इसी संधि के तहत शिवाजी को राजा की उपाधि दी जाती तथा शिवाजी की पुत्र को बरार में एक मनसब तथा जागीर प्रदान की जाती है
संधि के तहत शिवाजी को बीजापुर तथा गोलकुंडा में चौथ वसूली का अधिकार दिया जाता है शिवाजी की द्वारा 1669 में दरिया सहारन के नेतृत्व में एक नौसेना का गठन किया जाता है इसके पश्चात 16 70 ईसवी में शिवाजी तथा मुगलों के मध्य पुणे संघर्ष आरंभ होता है और शिवाजी ने अपने छीने हुए किलो पर पुणे अधिकार कर लिया जाता है इसके पश्चात शिवाजी पुरंदर व सीहल गढ़ को छोड़कर समस्त किलो पर अधिकार कर लिया जाता है इसके पश्चात शिवाजी के द्वारा दक्षिण के प्रांतों में चौथ वसूली तथा सरदेशमुखी कर वसूलने का कार्य प्रारंभ किया गया 8 मार्च 1670 को नीलू पंत मजूमदार के नेतृत्व में शिवाजी की द्वारा पुरंदर पर भी अधिकार कर लिया गया इसके पश्चात 13 अक्टूबर 1670 को शिवाजी की द्वारा पुनःसूरत को लूटा जा इसी समय मुगल सेना का नेतृत्व दाऊद खान व इख्लास खान के द्वारा किया गया इसी युद्ध को कंचन मंचन की धरा का युद्ध व वाणी डिंडोरी का युद्ध कहा जाता है 1672 ईस्वी में शिवाजी के द्वारा सूरत को पुणे लूटा है जो तीसरी बार था सलेहर का युद्ध 1672 ईस्वी इस युद्ध में शिवाजी के द्वारा पेशवा मारो त्रिमाल पिंगले दक्षिण की सूबेदार तथा उसकी साथी दिलेर खां को पराजित किया गया यह युद्ध गुजरात में खानदेश की सीमा पर लड़ा गया पन्हाला दूर पर अधिकार 1673 ईस्वी में पन्हाला दुर्ग पर अधिकार कर लिया गया इसके पश्चात वेद नूर पर भी अधिकार कर लिया गया इसके पश्चात शिवाजी के द्वारा 6 जून 1674 ईस्वी में पंडित गंगा भट्ट के द्वारा शिवाजी का राज्याभिषेक किया गया तथा इसके पश्चात शिवाजी के द्वारा अपने आपको छत्रपति घोषित किया गया तथा इसी समय शिवाजी के द्वारा अपनी पत्नी सोयराबाई को राज महर्षि घोषित किया गया और इसी समय शिवाजी के द्वारा राजा के पद को हिंदू पद पादशाही घोषित किया गया इस राज्याभिषेक कुछ ही समय पश्चात शिवाजी की माता जीजाबाई का देहांत हो जाता है इसी अवसर पर शिवाजी के द्वारा छत्रपति अंकित वह श्री शिवाजी छत्रपति अंकित सोने व चांदी के सिक्के जारी किए गए थे नोट इसके पश्चात इसी अवसर पर शिवाजी की द्वारा एक नया संवत भी चलाया गया था अपनी माता की मृत्यु के कारण शिवाजी ने पुनः राज्याभिषेक करवाया जाता है तथा इस समय राज्य पीसी शिवाजी की द्वारा 14 सितंबर 1674 शिवाजी की द्वारा अपनी तांत्रिक पंडित निश्चय पुरी गोस्वामी की सहायता से पुनः राज्याभिषेक करवाया 1677 ईस्वी में शिवाजी की द्वारा यल बरगा को विजित किया गया इसके पश्चात शिवाजी के द्वारा 1678 ईस्वी में जिंजी पर अधिकार कर लिया गया तथा यहां की किला दार अब्दुल्लाह हप्सी को पराजित किया गया यह शिवाजी की अंतिम विजय थी इसके पश्चात शिवाजी की 2 वर्ष बड़े दुख पूर्ण विधि तथा अपना पुत्र संभाजी अपनी पत्नी के साथ भागकर दक्कन की मुगल सूबेदार दिल्ली खांसी मिल गया तथा वह 1 वर्ष पश्चात पुणे लौटाया इसी संभाजी की प्रवृत्ति के कारण शिवाजी संभाजी से नाराज रहने लगे और बीमार हो तथा 1 वर्ष पश्चात 3 अप्रैल 1680 को शिवाजी की मृत्यु हो गई इसी समय शिवाजी की अन्य रानी पुतलीबाई शिवाजी के साथ सती हुई शिवाजी के उत्तराधिकारी शिवाजी की मृत्यु के समय शिवाजी के 2 पुत्र थे जिसमें एक संभाजी दूसरे राजाराम
शिवाजी का जन्म २० अप्रेल 1627 को शिवनेर की पहाड़ी के किले पर हुआ था इनके पिता का नाम शाह जी था इनका भोंषले वंश से था तथा माता का नाम जीजा बाई था जो देवगिरी के यादव वंशज के लाखूजी जाधवराव की पुत्री थी ऐसा कहा जाता है की मालोजी जो लाखूजी के घर नौकरी करने आये थे उसी समय शाह जी साथ थे तभी लाखूजी यादव ने अपनी पुत्री जीजा बाई का विवाह शाह जी करवा दिया जाता है ऐसा माना जाता है की लाखूजी यादव वंशज का संबंध मेवाड़ के सिसोदिया वंश से था इसके पश्चात शिवाजी को बेंगलुरु की जागीर मिलती है तथा इसके साथ ही शाहजी का भाई संभाजी भी मौजूद थे लेकिन इसके पश्चात शाह जी को बीजापुर की सेवा में गई तथा वहां पर रहते हुए शहाजी तुका बाई से विवाह कर लेते हैं जिसके कारण जीजाबाई का परित्याग कर देते हैं और जीजाबाई को शिवनेर पूना भेज दिया जाता है उसी समय उसी समय 1627 ईस्वी को शिवाजी का जन्म होता है और इसके पश्चात शिवाजी का बचपन अपनी माता जीजाबाई की देखरेख में बीता है तभी बचपन में उनका संरक्षण दादाजी कोंडदेव था तथा शिवाजी का गुरु रामदास था जिसने दासबोध नामक ग्रंथ की रचना की इसके पश्चात शिवाजी ने वहीं पर पुणे की जागीर में रहते हुए बचपन बिताया तथा 1646 में सर्वप्रथम कोंडाणा के किले को विजित करते हैं इसके पश्चात राजगढ़ के किले को विजीत किया जाता हैं इसके पश्चात 1647 इसमें में कोडाना का किले को विजित किया जाता है जिसका नाम बाद में सिंहल गढ़ रखा जाता हैं जब 1648 ईस्वी में शिवाजी के पिता शाहजी भोंसले को बीजापुर की सुल्तान ने कैद कर लिया तब शिवाजी ने मुगलों को सहायता देने का निश्चय किया यह खबर सुनकर बीजापुर का सुल्तान शिवाजी के पिता शाहजी को मौका दिया इसके पश्चात शिवाजी कुछ समय के लिए अपना प्रशासन सुदृढ़ीकरण में समय बिताया तथा इसके पश्चात 1654 ईस्वी में शिवाजी की द्वारा पुरंदर का किला को विजित किया गया इसके पश्चात शिवाजी की द्वारा 1656 इसी में जावली के किले पर आक्रमण किया और वहां के शासक चंद्रावली को पराजित किया इसके पश्चात शिवाजी का जावली पर अधिकार हो गया और 1657 में शिवाजी की द्वारा कोकण पर आक्रमण किया गया और के किले को मिस किया इसके साथ ही कोकण की कल्याण भिवंडी माहुल पर भी अधिकार कर लिया गया
- 1657 ईसवी में ही शिवाजी तथा मुगलों के मध्य संघर्ष आरंभ होता है उसी समय दक्षिणी मुगल साम्राज्य का गवर्नर औरंगजेब था
1659 ईस्वी में शिवाजी के द्वारा कई क्षेत्रों पर अपना अधिकार कर लिए जाने के कारण बीजापुर का सुल्तान बेबी हुआ और अपने प्रधान सेनापति अफजल खान को भेजा अफजल खान कहां की वह शिवाजी को अपनी थोड़ी सी उतरे बिना ही बंदी बनाकर लेकर आएगा इसीलिए अफजल खान नीति के चाल चलते हुए शिवाजी की संधि का प्रस्ताव अपनी मंत्री कृष्ण जी भास्कर को भेजता है लेकिन शिवाजी हिंदुओं की मर्यादा को ध्यान रखती हुई कृष्ण जी भास्कर को समझाते हैं तब कृष्ण जी भास्कर अफजल खान का भेद बता देते इसी कारण जब वह कर संजय भास्कर अफजल खान के शिविर में पहुंचते हैं वहीं दूसरी ओर शिवाजी भी तैयार होकर अपने विश्वस्त सैनिकों को झाड़ियों में छुपा दे दे और अपने आप को सुरक्षित रखने के लिए अपने हाथों में बग नखा पेनकर पहनकर शिवाजी अफजल खान की सामने उपस्थित होते हैं शिवाजी अफजल खान से मिलने गए तब अपने साथ जीमेल वे शंभू जी ताऊ जी को साथ लेकर आए वही अफजल खान शिवाजी दोनों गले मिलते हैं तभी अफजल खान शिवाजी को मारने का प्रयास करते हैं वही शिवाजी के द्वारा अफजल खान की हत्या कर दी जाती है वहीं दूसरी ओर अफजल खान पी अपने साथ अपना प्रसिद्ध तलवारबाज सैयद बांदा को साथ लेकर शिवाजी के सामने उपस्थित हुआ लेकिन शिवाजी की तत्परता देखकर वह भी कुछ नहीं कर सका और अफजल खान मारा जाता इसके पश्चात शिवाजी के द्वारा पुणे में एक सैनिक दरबार लगाया जाता है
शाहिस्ता खान से संघर्ष शिवाजी की बढ़ती हुई घटना से मुगल शासक औरंगजेब भयभीत हो जाता है और 1659 में ही अपने अपने मामा शाइस्ता को शिवाजी की विरुद्ध दक्षििण का दक्षिण का सूबेदार बना कर भेजता है साहित्य का के द्वारा बीजापुर की सुल्तान से गठबंधन स्थापित कर लिया जाताा है और इसीी के पूना चाकन कहिया कल्याण पर अधिकार
जब शाइस्ता खान के द्वारा 15 अप्रैल 1663 को शाइस्ता खान पूना पर अधिकार करता है और शाम को विश्राम कर रहा था तभी शिवाजी के द्वारा रात्रि में बरात के रूप में अपने सैनिक सहित पूर्णा में उपस्थित होते हैं और शाइस्ता खां पर आक्रमण कर देते हैं इसी समय शाइस्ता खान भयभीत हो जाता है और वे भागता है इसी समय उसकी अंगुली दरवाजे में फंस जाती है और टूट जाती है इसी समय शाहिद खां के पुत्र अब्दुल फतेह खां की हत्या कर दी जाती हैं
सूरत की लूट। 1664 ईस्वी में शिवाजी के द्वारा सूरत पर धावा बोला जाता है इसी समय सूरत का गवर्नर इनायत खान और शिवाजी को इस लूट में अत्यधिक धन की प्राप्ति होती है ऐसा कहा जाता है कि शिवाजी के द्वारा इस लूट में विदेशी शक्तियां डच तथा अंग्रेजों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाता है इसी समय अंग्रेज बच्ची का प्रमुख सर जॉन ऑक्साइड एंड था
पुरंदर की संधि 1665 जब शिवाजी की सफलताओं से भयभीत होकर औरंगजेब के द्वारा नई पर यह शुरू किया जाता है जिसके तहत उसने आमिर के शासक मिर्जा राजा जय सिंह को शिवाजी का दमन करने हेतु भेजा जाता है इसमें मिर्जा राजा जयसिंह की द्वारा पुरंदर का घेरा डाला जाता है जब जय सिंह के द्वारा पुरंदर का गिरा डाला जाता है उसी समय शिवाजी का प्रमुख सेनापति मुरार वीजा प्रभु था जो इस युद्ध में शहीद होता है अंत में शिवाजी के द्वारा आत्मसमर्पण करना पड़ता है और शिवाजी की द्वारा पुरंदर की संधि करने के लिए विवश होना पड़ता है
संधि की शर्ते
1 शिवाजी की अपनी जीते हुए किलो में से 22 किल्ले मुगलों को सौंपने होंगे
2 शिवाजी के पुत्र को किस संधि के तहत 5000 का मनसब दिया जाएगा
3 शिवाजी को बीजापुर के सुल्तान कुछ सहायता देने के लिए वचनबद्ध किया जाएगा
इसके पश्चात 12 मई 1666 को शिवाजी अपने पुत्र के साथ औरंगजेब की दरबार उपस्थित होते हैं तभी शिवाजी को अपने से पराजित तथा 5000 मनसबदारी में पीछे खड़ा किया जाता है इससे शिवाजी नाराज हो जाते हैं वह वहां से निकलने का प्रयास करते हैं तभी औरंगजेब के कहने पर उन्हें उन्हें कैद कर लिया जाता है और आगरा की राम सिंह के महल में ठहराया जाता है खेत में रहती हूं शिवाजी परेशान रहने लगते हैं तभी एक दिन उनके द्वारा बहाना बनाया जाता है कि मैं बीमार हूं इसलिए गरीबों को फल अनाज दान देना चाहता हूं कई दिनों तक शिवाजी के द्वारा फलों व अनाज का दान किया जाता है प्रारंभ में तुम सैनिकों के द्वारा अनाज व फलों की टोकरी की जांच की जाती है परंतु कई दिनों बाद यह जांच करना सैनिक छोड़ देते हैं शिवाजी एक दिन मौका देखकर उन टोकरी ओं में मैं स्वयं तथा अपने पुत्र सहित निकल जाते हैं तथा अपनी जगह अपनी भाई हीरो जी को को लिटा कर निकल जाते हैं इसके पश्चात शिवाजी साधु की भी इसमें पहले मथुरा गई तथा इसके पश्चात वह काशी पर्याग होती हुई गोंडवाना वे गोलकुंडा से होती हुई वे रायगढ़ पहुंचते हैं और रायगढ़ जब पहुंचते ही तब 12 सितंबर 1666 को समय था
इसके पश्चात औरंगजेब के द्वारा शिवाजी की गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए अपने पुत्र मुअज्जम को दक्षिण में सूबेदार बनाकर भेजा जाता है और मोअज्जम 1667 ईस्वी को दक्षिण पहुंचता है और 16 से 68 ईसवी में शिवाजी के साथ एक संधि की जाती है इस संधि में मारवाड़ का शासक जसवंत सिंह भी शामिल था इसी संधि के तहत शिवाजी को राजा की उपाधि दी जाती तथा शिवाजी की पुत्र को बरार में एक मनसब तथा जागीर प्रदान की जाती है
संधि के तहत शिवाजी को बीजापुर तथा गोलकुंडा में चौथ वसूली का अधिकार दिया जाता है शिवाजी की द्वारा 1669 में दरिया सहारन के नेतृत्व में एक नौसेना का गठन किया जाता है इसके पश्चात 16 70 ईसवी में शिवाजी तथा मुगलों के मध्य पुणे संघर्ष आरंभ होता है और शिवाजी ने अपने छीने हुए किलो पर पुणे अधिकार कर लिया जाता है इसके पश्चात शिवाजी पुरंदर व सीहल गढ़ को छोड़कर समस्त किलो पर अधिकार कर लिया जाता है इसके पश्चात शिवाजी के द्वारा दक्षिण के प्रांतों में चौथ वसूली तथा सरदेशमुखी कर वसूलने का कार्य प्रारंभ किया गया 8 मार्च 1670 को नीलू पंत मजूमदार के नेतृत्व में शिवाजी की द्वारा पुरंदर पर भी अधिकार कर लिया गया इसके पश्चात 13 अक्टूबर 1670 को शिवाजी की द्वारा पुनःसूरत को लूटा जा इसी समय मुगल सेना का नेतृत्व दाऊद खान व इख्लास खान के द्वारा किया गया इसी युद्ध को कंचन मंचन की धरा का युद्ध व वाणी डिंडोरी का युद्ध कहा जाता है 1672 ईस्वी में शिवाजी के द्वारा सूरत को पुणे लूटा है जो तीसरी बार था सलेहर का युद्ध 1672 ईस्वी इस युद्ध में शिवाजी के द्वारा पेशवा मारो त्रिमाल पिंगले दक्षिण की सूबेदार तथा उसकी साथी दिलेर खां को पराजित किया गया यह युद्ध गुजरात में खानदेश की सीमा पर लड़ा गया पन्हाला दूर पर अधिकार 1673 ईस्वी में पन्हाला दुर्ग पर अधिकार कर लिया गया इसके पश्चात वेद नूर पर भी अधिकार कर लिया गया इसके पश्चात शिवाजी के द्वारा 6 जून 1674 ईस्वी में पंडित गंगा भट्ट के द्वारा शिवाजी का राज्याभिषेक किया गया तथा इसके पश्चात शिवाजी के द्वारा अपने आपको छत्रपति घोषित किया गया तथा इसी समय शिवाजी के द्वारा अपनी पत्नी सोयराबाई को राज महर्षि घोषित किया गया और इसी समय शिवाजी के द्वारा राजा के पद को हिंदू पद पादशाही घोषित किया गया इस राज्याभिषेक कुछ ही समय पश्चात शिवाजी की माता जीजाबाई का देहांत हो जाता है इसी अवसर पर शिवाजी के द्वारा छत्रपति अंकित वह श्री शिवाजी छत्रपति अंकित सोने व चांदी के सिक्के जारी किए गए थे नोट इसके पश्चात इसी अवसर पर शिवाजी की द्वारा एक नया संवत भी चलाया गया था अपनी माता की मृत्यु के कारण शिवाजी ने पुनः राज्याभिषेक करवाया जाता है तथा इस समय राज्य पीसी शिवाजी की द्वारा 14 सितंबर 1674 शिवाजी की द्वारा अपनी तांत्रिक पंडित निश्चय पुरी गोस्वामी की सहायता से पुनः राज्याभिषेक करवाया 1677 ईस्वी में शिवाजी की द्वारा यल बरगा को विजित किया गया इसके पश्चात शिवाजी के द्वारा 1678 ईस्वी में जिंजी पर अधिकार कर लिया गया तथा यहां की किला दार अब्दुल्लाह हप्सी को पराजित किया गया यह शिवाजी की अंतिम विजय थी इसके पश्चात शिवाजी की 2 वर्ष बड़े दुख पूर्ण विधि तथा अपना पुत्र संभाजी अपनी पत्नी के साथ भागकर दक्कन की मुगल सूबेदार दिल्ली खांसी मिल गया तथा वह 1 वर्ष पश्चात पुणे लौटाया इसी संभाजी की प्रवृत्ति के कारण शिवाजी संभाजी से नाराज रहने लगे और बीमार हो तथा 1 वर्ष पश्चात 3 अप्रैल 1680 को शिवाजी की मृत्यु हो गई इसी समय शिवाजी की अन्य रानी पुतलीबाई शिवाजी के साथ सती हुई शिवाजी के उत्तराधिकारी शिवाजी की मृत्यु के समय शिवाजी के 2 पुत्र थे जिसमें एक संभाजी दूसरे राजाराम
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