Wednesday, February 5, 2020

शिवाजी के उत्तराधिकारी
शिवाजी की मृत्यु के पश्चात उत्तराधिकार संघर्ष आरंभ होता है इसी समय शिवाजी की मुख्य रूप से दो पत्नियां थी जिसमें एक सवेरा भाई वे दूसरी सईबाई निंबालकर था दोनों पत्नियों से एक  एक पुत्र हुए पुत्र हुए जिसमें शिवाजी की इच्छा के अनुसार राजाराम मृत्यु के पश्चात शासक बने उसी समय शिवाजी के दूसरे पुत्र संभाजी कैद में थे मृत्यु का अर्थात शिवाजी की मृत्यु का समाचार जैसे ही संभाजी को प्राप्त होता है तो वे अपने को कैद रखने वाले सेना नायक को रिश्वत देकर निकलने में कामयाब हो जाते हैं और उसी समय राजाराम को हटाकर शिवम शासक बन जाते
संभाजी
संभाजी का जन्म साईं बाई निंबालकर की कोख से 1657 को हुआ था तथा इनकी गुरु का नाम केशव पर तथा उमा जी पंडित था इनकी पत्नी का नाम येसूबाई तथा इनके एक पुत्र हुआ जिनका नाम साहू था
20 जुलाई 1680 को संभाजी शासक बनते हैं तथा अपना राज्याभिषेक रायगढ़ में करवाते हैं और रायगढ़ को ही अपनी राजधानी बनाते हैं आरंभ से ही संभाजी क्रोधी विलासी तथा अभिमानी गुण मौजूद थे जिसके कारण धीरे धीरे द्वेष की भावना उदय होने लगी और साम्राज्य में षडयंत्र रचे जाने लगे जैसे ही संभाजी शासक बनते हैं तो अपनी परम मित्र कवि कलश को प्रमुख प्रधान सलाहकार नियुक्त करते हैं इसी कारण शिवाजी द्वारा गठित अष्टप्रधान का खंडन होता है संभाजी के विरुद्ध रचे जाने वाले षडयंत्र ओं में राजाराम उसकी माता सोयराबाई तथा अन्नाजी दत्तो थे जो संभाजी की विरुद्ध है एक संगठन बनाया परंतु संभाजी के द्वारा इस संगठन को बड़ी निर्दयता पूर्वक कुचल दिया गया इसके पश्चात संभाजी की द्वारा सीपीयू अंग्रेजों तथा पुर्तगालियों के मध्य संघर्ष आरंभ होता है और इसी समय औरंगजेब का विद्रोही पुत्र अकबर संभाजी की शरण में उपस्थित होता है तभी वह उसी सहायता देने का वचन कर देते हैं अपनी विद्रोही पुत्र का पीछा करते हुए 1686 ईस्वी में औरंगजेब दक्षिण पहुंचता है और 1688 ईस्वी में संभाजी तथा कवि कलश दोनों विलास गढ़ भाग जाते हैं वहीं औरंगजेब की सुविधा मकरम खान के द्वारा विलास गढ़ का खेड़ा डाला जाता है उसी समय कवि कलश तथा संभाजी की हत्या कर दी जाती है और संभाजी के पुत्र साहू को कैद में डाल दिया जाता है इसके पश्चात पुणे राजाराम साहू का संक्षिप्त बनता है
राजाराम 1690 से 1700
संभाजी की मृत्यु के पश्चात साहू की संरक्षक के रूप में राजाराम शासक बनता है वह एक साहसी प्रतिभावान व्यक्ति था परंतु वह एक योग्य सेनापति नहीं था बढ़ती हुई मुगल में मराठा गतिरोध के मध्य औरंगजेब के द्वारा दक्षिण का सूबेदार जुल्फिकार खान को नियुक्त किया जाता है जिसने यह सुबह तथा साहू को कैद कर लिया जाता है इसी समय मराठों के साथ उनका प्रधान सेनापति सूर्य जीपी साल मराठों के साथ विश्वासघात करते हैं वही यह सुबह तथा साहू को कृपया और करवाता है इसी समय इसका विरोध पहलाद मीरा जी तथा शंकर जी नारायण के द्वारा किया जाता है परंतु वह साहू तथा यीशु भाई को की धोने से नहीं बचा पाते इसके पश्चात राजाराम राइड को छोड़कर जिंजी को अपना केंद्र वह राजधानी बनाते हैं जो लगभग 1698 इसवी तक रहता है इसके पश्चात जुल्फीकार खान के द्वारा जिन जी का घेरा डाला जाता है परंतु वह सफल नहीं हो पाता है तभी राजाराम की द्वारा सातारा को अपना केंद्र बनाया जाता है तथा इसी को ही अपनी राजधानी बनाई जाती है इसी समय राजा राम के द्वारा अष्टप्रधान में एक नई पद का गठन किया जाता है जिसका नाम प्रतिनिधि था इनके अलावा भी राजा राम के द्वारा 2 नए पद सृजित किए जाते हैं जिसमें हुकूमत पनाह तथा पद सचिव था
शिवाजी द्वितीय 1700 1707 1700 ईस्वी में राजा राम की मृत्यु के पश्चात उसका 4 वर्षीय राजाराम द्वितीय को शासक बनाया जाता है परंतु शासन की वास्तविक शक्तियां उसकी माता ताराबाई के हाथ में थी जिसके कारण ताराबाई को ही शासक माना जाता है यह एक वीर साहसी महिला थी जिसने रायगढ़ सातारा तथा सीहल गढ़ पर अपना अधिकार कर लिया इसने मुगलों के विरुद्ध भी संघर्ष जारी रखा तथा इस समय औरंगजेब के द्वारा दक्षिण का सुविधा जुल्फिकार खान को बनाया तथा कुछ समय पश्चात औरंगजेब की मृत्यु हो गई उस समय उत्तराधिकार के युद्ध में मुअज्जम बहादुर शाह के नाम से शासक बना तभी जुल्फिकार खान के द्वारा बहादुर शाह को समझाया और जुल्फिकार खान के समझाने पर बहादुर शाह की द्वारा केंद मैं बंद मराठा शासक अर्थात साहू को रिहा कर दिया जिसके कारण मराठों में उत्तराधिकार संघर्ष पर आम और मराठा दो भागों में विभक्त हो गए जिसमें अधिकांश मराठा  के द्वारा साहू को समर्थन दिया गया तब साहू अपना स्थान हासिल करने तथा वहीं दूसरी ओर ताराबाई अपनी प्रतिष्ठा हासिल करने के लिए दोनों के मध्य खेड़ा का युद्ध होता है यह युद्ध 12 अक्टूबर 1707 मैं लड़ा गया जिसमें साहू बालाजी विश्वनाथ की सहायता से विजय प्राप्त की तभी साहू के द्वारा बालाजी विश्वनाथ को अपना प्रथम पेशवा नियुक्त कर दिया उसके पश्चात 1708 स्विमिंग साहू के द्वारा सातारा पर अधिकार के शिवम को शासित घोषित कराता  है साहू 1708 1749 जैसे ही साहू शासक बनता है तभी उसकी द्वारा सेनाकर्ते पद का गठन किया या सर्जन की तथा इस पद पर बालाजी विश्वनाथ को नियुक्त कर दिया गया इसी घटना के तहत उत्तरी मराठा शक्ति का केंद्र सातारा जिसका मुखिया साहू वे दक्षिणी मराठा शक्ति का केंद्र कोल्हापुर हो गया और उसका मुखिया शिवाजी द्वितीय बना 1719 ईस्वी में हुसैन बंधु की मदद से मुगल बादशाह रफी उर जात के मध्य  मुगल मराठा संधि होती है  यह संधि  दिल्ली की संधि के नाम से भी जानी जाती है इस संधि की शर्ते  निम्न है  इसी संधि के पेड़ साहू को  मराठा शक्ति के रूप में मान्यता दी गई दो  इसी संधि के तहत शाम को दक्षिण क्षेत्र में 6 सीटों पर  चौथा  सरदेशमुखी वसूलने का अधिकार दिया है नोट  इसी संधि को रिचर्ड डे टेंपल मराठा का मैग्नाकार्टा कहा जाता है इसके पश्चात बालाजी विश्वनाथ 1 वर्ष तक मराठों को वित्तीय साधन व्यवस्थित करने में लगाया तथा 1720 ईस्वी में बालाजी विश्वनाथ की मृत्यु हो जाती है इसके पश्चात 1728 इसमें नहीं पाल खेड़ा का युद्ध होता है इसके पश्चात 1731 ईस्वी में शिवाजी द्वितीय की मृत्यु हो जाती है इसके पश्चात संभाजी भी थी शासक बनते हैं और 1731 ईस्वी में वरना की संधि होती है जिसमें साहू को ही प्रमुख मान लिया जाता है और शिवाजी दी थी साहू के अधीन शासन करते हैं इसके पश्चात 1749ईसवी को साउथ की मृत्यु हो जाती है और उसकी पहचान राजा राम सेकंड शासक बनता और 1750 नाम मात्र का छत्रपति रहता है और मराठा शक्ति का प्रमुख पेशवा बन जाता और बालाजी बाजीराव के द्वारा समस्त शक्तियां अपने हाथ में ले ली जाती है

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